अंर्तमन को तृप्त करने वाला वीकेंड
हमारी जिंदगी में कुछ दिन ऐसे आते हैं, जो आते एकदम धीमे हैं, हमें उस दिन से कोई खास अपेक्षा नहीं होती, उस दिन को बीताने का कोई स्पेशल प्लान नहीं होता और अनपेक्षित रूप से वो दिन कुछ ऐसा दे जाते हैं, जो हमेशा याद रह जाता है। इस वीकेंड मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दुबई में रहने वालों के ज्यादातर वीकेंड शुक्रवार की रात लेटनाईट मुवी से शुरू होते हैं, अगली सुबह देर से उठना, ब्रेकफ्रास्ट और लंच मिलाकर ब्रंच कर लेना और थोड़ा सुस्ताने के बाद ढलती शाम से देर रात तक घुमना-फिरना, दोस्तों से बतियाना। यह शहर आपको खुश रहने के बहुत सारे मौके देता है बशर्तें आप इस शहर में जीने की कठिन शर्तों को आप ने अपनी आदत में बना लिया हो। खैर यह ब्लॉग दुबई के उन आकर्षणों के बारे में नहीं हैं, जिस पर दुनिया रिझ जाती है। ये उस कथा के बारे में हैं, जो हमें बाहरी चमक-दमक से भीतर की ओर जाने की राह दिखाती है। बीते दिनों दुबई के सिंधी सेरेमॉनियल हॉल में दो दिवसीय भागवत चिंतन का आयोजन हुआ। मालवा के संत श्री प्रभुजी नागर ( सुपुत्र संत श्री कमल किशोर जी नागर ) के श्रीमुख से भागवत चिंतन सुनने का अवसर म...