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Showing posts from October, 2022

सकल कलुष निवारणी गंगे

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  नौ दिन नौ नदियां नौवां दिन, नौवीं नदी गंगा नौ दिन, नौ नदियां में नौवें दिन जानिए गंगा के बारे में: गंगा का नाम लेते ही जहन में तस्वीर उभरती हैं कलरव करती बहती धारा और उसमें आचमन करते लोगों की। हिमालय से उतरकर बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ते हुए गंगा दुनिया के सबसे ऊपजाऊ मैदानों को सिंचती हुई, असंख्य जीवों की प्यास को तृप्त करती हुई आगे बढ़ती है। गंगा के नाम पर कई कीर्तिमान हैं मसलन दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा गंगा नदी बनाती है। ऋग्वेद में गंगा का जिक्र हैं, महाभारत में गंगा का वर्णन हैं, रामायण में श्रीराम का केवट की नाव पर सवार होकर गंगा नदी पार करने के प्रसंग का उल्लेख हैं। अपने उदगम से सागर मिलन तक गंगा 2500 किलोमीटर का मार्ग तय करती हैं। इस पापमोचनी, मोक्षदायिनी नदी से हम सचमुच अपनी मां की तरह प्रेम करते हैं। जिस तरह मां से बहुत प्रेम करने के बावजूद शायद हम अपनी मां का उतना ख्याल नहीं रख पाते, जितना रखना चाहिए था। बस वैसा ही कुछ गंगा के साथ भी हैं, हम इससे प्रेम बहुत करते हैं पर यह प्रेम हमारी भावना, आस्था और स्मृतियों तक सीमित रह जाता हैं। हमारी मां हमसे क्या चाह रही हैं, आमतौर पर ह...

जितने नाम, उतनी कथाएं ब्रह्मपुत्र

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  नौ दिन, नौ नदियां आठवां दिन, आठवीं नदी – ब्रह्मपुत्र नौ दिन, नौ नदियां श्रृंखला के आठवें दिन बात करते हैं ब्रह्मपुत्र की। इसके किनारे फैले हैं - चाय के बागान, इस तरह चाय के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से ब्रह्मपुत्र रोज सुबह हमारे दिन का हिस्सा बन जाता है।  साफ पानी से लबालब भरा ब्रह्मपुत्र तिब्बत से बहते हुए भारत और भारत से बांग्लादेश पहुंच जाता है, जी हां, पहुंच जाता है क्योंकि पौराणिक संदर्भों में यह नदी नहीं नद है। यह ब्रह्मा का पुत्र है। भारत की तमाम नदियों को पौराणिक संदर्भों में स्त्री रूप में चित्रित किया गया है। ब्रह्मपुत्र और सोनभद्र पुरूष रूप में वर्णित है इसलिए अंग्रेजी भाषा और विश्वपटल पर ये रिवर है लेकिन भारतीय समुदाय में ये नद है। इसके कई नाम हैं और हर नाम के साथ एक कहानी जुड़ी है। इसका उद्गम हिमालय के उत्तर में तिब्बत के पुरंग जिले में मानसरोवर झील के निकट से होता है। तिब्बत में इसे यारलुंग सांपो कहते हैं। अरूणाचल प्रदेश में सियांग और धियांग, असम में ब्रह्मपुत्र, बंग्लादेश में यमुना के नाम से पुकारा जाता है। ब्रह्मपुत्र का बांग्लादेश में गंगा से संगम होता है। बां...

नौ दिन, नौ नदियां

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    सातवां दिन , सातवीं नदी कावेरी कहानी ब्रह्मा पुत्री की … आज बात करते हैं , उस नदी की जो स्वर्गलोक में ब्रह्मा की पुत्री थी , भगवान गणेश के हाथों वो एक नदी में तब्दील हो गई और हजारों वर्षों से धरती की प्यास बुझा रही है। ये कहानी है - कावेरी नदी की। भारत की पवित्र नदियों में से एक कावेरी के जन्म की कई कथाएं धर्मग्रंथों में और जनश्रुतियों में सुनने को मिलती है। भौगोलिक रूप से देखा जाए तो पश्चिम घाट की ब्रह्मगिरी पर्वत श्रृंखला पर तालकावेरी नामक कुंड से कावेरी का जन्म होता है। यहां से तमिलनाडु और कर्नाटक राज्य में 800 किलोमीटर की यात्रा कर कावेरी बंगाल की खाड़ी में समा जाती है। तमिल साहित्य में कावेरी को पोन्नी नाम से पुकारा गया है , कही - कही इसका जिक्र स्वर्णदासी के नाम से भी हैं। स्वर्णदासी की संज्ञा इसके किनारों पर जमा होने वाली सुनहरी रेत की वजह से दी गई। यह नदी दक्षिण भारत विशेषकर तमिलनाडु और कर्नाटक के खेतों में सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। यहां लोग इसे कावेरी अम्मा के रूप में पूजते हैं। बहुप्रचलित कथा के मुताबिक ब्रह्माजी की एक पुत्री विष्णुमाया थी , जो पृथ्वी ...