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Showing posts from February, 2023

खिलौनों का तांडव

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  खिलौनों का तांडव   मैं और मेरी तन्हाई जरा चौंक गई जब खाली घर में एक नई आवाज हुई लगा जैसे पड़ोस में किसी ने तेज टीवी है चलाया पर ये क्या , ये तो अपना गुलाबी टेड़ी बीयर था चिल्लाया   मैंने हैरानी से पूछा , कि तुम बोलते हो ? वो नाराजगी में बोला , हां पर तुम सुनती नहीं हो। कितनी धूल जमी है , मेरे पास साफ करती नहीं हो। अचानक छोटा तेंदूआ मुझ पर गुर्राया अरे , उसके पास ही क्यों खड़ी हो ? कबसे भूखा हूं , खाने को कुछ देती क्यों नहीं हो ? मैं हुई अवाक् , वो और गुस्साया कहा सुना नहीं , खाना हैं मैंने मंगवाया   कीचन की ओर चली ही थी कि नई आवाज गूंजी खरगोश बोला , मुझे इस तेंदुए के पास से हटाओ   जी भूखा है , कही मेरा ही शिकार ना कर ले इतने में बड़ा टैडी बीयर बोला , अरे पहले मेरा डायपर तो बदल दें खिड़की खोलो मुझे घर जाना है , अब तो पैंग्विन भी लगा बोलने   मैं थी बुरी तरह घबराई , ये खिलौनों के अंदर ...

हां, मैं एक लड़की हूं

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  हां , मैं एक लड़की हूं   हां , मैं एक लडकी हूं                                          साधारण हूं, छोटे शहर से मध्यमवर्गीय घर से हूं, हां मैं एक लड़की हूं   मैं उत्साह हूं उमंग हूं तरंग हूं मिठास हूं मैं शब्द और भाव हूं मैं रस और काव्य हूं   पर तुम्हें मुझमें दिखता सिर्फ एक छोटा घर और पुराना मोहल्ला है सरकारी स्कूल और स्टेट बोर्ड की पढ़ाई का ठप्पा है तुम्हारी आंखे क्यों मेरी मार्कशीट के अंक नहीं पढ़ सकी क्यों मेरे मैडल की चमक नहीं सराह सकी   दरअसल दोष तुम्हारा नहीं उस सोच का था जिस पर धनसंपत्ति और दौलत का पहरा था   पर तुम्हारी सोच से मुझे अब पड़ता कोई फर्क नहीं अच्छा हुआ कि दौलत का तराजू तुम्हारा है , मेरा नहीं   हुआ यूं कि स्कूल के ब्लैकबोर्ड ने दुनिया देखने की खिड़की दिखा दी उस खिड़की ने मुझे उजालों का पता बता दिया थोड़ी हिम्मत कर मैंने खिड़की से कूदकर देखा तो अपने सामने खुला दरवाजा पाया  ...

शिवत्व और संघर्षों का विष

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आदिदेव शंकर ब्रह्मांड के मूल आधार है। जब संसार में कुछ नहीं था , तब भी शिव थे और जब संसार में कुछ नहीं रहेगा , तब भी शिव रहेंगे। ऊंचे पर्वतों के शिखरों पर , बर्फिले दर्रों पर , गहरी नदियों के तल में , धरती से क्षितिज तक फैले रेगिस्तान समेत घने जंगलों की ओट में छुपी गुफाओं में हर ओर शिव का वास है। कहते हैं कि शिव - शंकर भोले - भंडारी है , बड़ी आसानी से भक्तों पर प्रसन्न हो जाते है और मांगने पर मनचाहा वर दे देते हैं। सचमुच कितने भोले है प्रभु। जहां बैठा दो , वहीं का नाम धर लेते हैं। आसानी से मिल जाने वाले बैर , धतूरा , आंकडा , बिल्व स्वीकार कर लेते हैं। यूं तो शिव के नाम पर संस्कृत के क्लिष्ट स्रोत है , पर जटिल आराधना में दिक्कत हो तो शिवम् - शिवम् के नाम से प्रसन्न हो जाते हैं। एक ओर वे   इतने सहज और सरल है , वहीं दूसरी ओर संसार को बचाने के लिए विष को अपने कंठ में धर लेते हैं , बिना किसी अपेक्षा के। भगवान शंकर से जुडी अनगिनत कहानियों को मैं बचपन से सुनती रही हूं। कभी - कभी मुझे लगता है कि इन कहानियों के नायक भगवान शिव के कुछ अंश हमारे आस - पास ही हैं। बिना जटाओं के , बिना भभूत...