खिलौनों का तांडव
खिलौनों का तांडव
मैं और मेरी तन्हाई जरा चौंक गई
जब खाली घर में एक नई आवाज हुई
लगा जैसे पड़ोस में किसी ने तेज टीवी है चलाया
पर ये क्या, ये तो अपना गुलाबी टेड़ी बीयर था चिल्लाया
मैंने हैरानी से पूछा, कि तुम बोलते हो?
वो नाराजगी में बोला, हां पर तुम सुनती नहीं हो।
कितनी धूल जमी है, मेरे पास साफ करती नहीं हो।
अचानक छोटा तेंदूआ मुझ पर गुर्राया
अरे, उसके पास ही क्यों खड़ी हो?
कबसे भूखा हूं, खाने को कुछ देती क्यों नहीं हो?
मैं हुई अवाक्, वो और गुस्साया कहा
सुना नहीं , खाना हैं मैंने मंगवाया
कीचन की ओर चली ही थी कि नई आवाज गूंजी
खरगोश बोला, मुझे इस तेंदुए के पास से हटाओ
जी
भूखा है, कही मेरा ही शिकार ना कर ले
इतने में बड़ा टैडी बीयर बोला, अरे पहले मेरा डायपर तो बदल दें
खिड़की खोलो मुझे घर जाना है, अब तो पैंग्विन भी लगा बोलने
मैं थी बुरी तरह घबराई,
ये खिलौनों के अंदर आज कौनसी शक्ति थी समाई
वो साथ मैं चिल्लाएं, क्या मैडमजी तुम तो बहुत भोली हो
कीचनसेट टेबल पर रखा है, उसे ही
हमें दे दो
खाना अपना खुद बना लेंगे और एक-दूसरे को खिला देंगे
अब सफेद टैडी बोला वो मॉस्क का डब्बा मुझे दे दो
मॉस्क से डाईपर बना लेती है, तुम्हारी गुडिया गजब की है
डरो मत मैं खरगोश को नहीं खाऊंगा
वो प्लास्टिक का सेब ही निपटाउंगा
छोटा तेंदुआ
कर रहा था आश्वस्त
इस बीच पेंग्विन बोला जरा एसी तो चलाओ
नार्थपोल से आया हूं,कुछ तो समझदारी दिखाओ
अब मेरी जान में जान आई
एसी का रिमोट तलाशने आंखे
खोलकर घुमाई
तो झटका सा आया
मैं थी नींद में
तो सपने में खिलौनों ने तांडव था मचाया
दौड़कर पहुंची दूसरे कमरे में तो देखा
रेगिस्तान का ऊंट और उत्तरी ध्रव का पेंग्विन साथ मुस्कुरा रहे थे
खरगोश और तेंदूएं साथ बैंठे प्लास्टिक की रसोई को निहार रहे थे
बड़े भालू की गोद में नन्हीं माशा मुस्कुरा रही थी
मैंने उनके पास से बंदूक उठा ली
हटा दिया मिलिट्री का टैंक और लड़ाकू विमान भी
अब वो ज्यादा मुस्कुरा रहे थे
शायद हमें भी साथ-साथ रहना सीखा रहे थे।

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