एक दुआ खुद के लिए
चलो इस रमादान कुछ ऐसा करते हैं
एक दुआ खुद के लिए करते हैं।
खामियों को अपनी थोड़ा नजरअंदाज करते
हैं
खूबियों को जरा कसकर पकड़ते हैं
चलो इस बार कुछ ऐसा करते हैं
एक दुआ खुद के लिए करते हैं
ठहरकर थोड़ी देर आस-पास नजर घुमाते हैं
कितना कुछ बिखरा है चारो ओर
धीरे-धीरे सब समेटते हैं
कुछ बातों को यादों की अलमारी में
कुछ किस्सों को हौसलों की गुल्लक में
अच्छी तरह से सहेज लेते हैं
चलो इस रमादान कुछ ऐसा करते हैं
एक दुआ खुद के लिए करते हैं
भूरी चिड़ियां,
सुनहरी बिल्ली, काला कबूतर
गुलाबी आसमान,
सुनहरी रेत, नीला समंदर
मखमली घास पर सिरचढ़ा खजूर
सुर्ख गुलाब के नीचे हरे-
हरे कांटे
इन रंगों को आंखों में अपनी भरते हैं
चलो इस रमादान कुछ ऐसा करते हैं
एक दुआ खुद के लिए करते हैं
रेत के महलों को गढ़कर
गुडियां के घर में झांककर
खिलौने की ट्रेन का
ट्रैक नया बनाते हैं
छोटी-छोटी खुशियों से
मन का बैंक अकाउंट भरते हैं
चलो इस रमादान कुछ ऐसा करते हैं
पुरानी गलतियों के लिए खुद को माफ करते हैं
कुछ सीमाओं को अपनी कुबूल कर लेते हैं
बैचेनियों को समझदारी की चादर ओढ़ाकर
बेसब्रियों को सब्र का सबक पढ़ाकर
फिर से कोशिश नई-नई करते हैं
चलो इस रमादान कुछ ऐसा करते हैं
एक दुआ खुद के लिए करते हैं।

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